श्रीमद भगवद गीता और शिक्षक-छात्र के बीच सम्बन्ध का सार

Authors

  • Biswajyoti Sarmah Tyagbir Hem Baruah College

Abstract

श्रीमद भगवद गीता में शिक्षक-छात्र के संबंध का सार एक अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है। इसके अनुसार, जब छात्र गुरु के प्रति विश्वासपूर्वक आदर और प्रेम रखता है, तब उसे स्वयं को सीखने की प्राप्ति होती है। गुरु छात्र के लिए मार्गदर्शक होता है, जो उसे सही और आदर्श मार्ग पर ले जाता है। इस संबंध में गीता एकता, विश्वास और सहयोग को प्रमुखता देती है जो समस्याओं को हल करने में मदद करता है। गीता छात्र को आत्मिक उन्नति के माध्यम से उच्चतम ज्ञान का प्राप्तकर्ता बनाती है और उसे ब्रह्मांडिक चेतना के साथ संयुक्त करती है। इस प्रकार, गीता शिक्षक-छात्र के संबंध का महत्वपूर्ण सार सार्थकता से प्रस्तुत करती है।

Keywords:

श्रीमद भगवद गीता, शिक्षक के गुण, छात्र के गुण, शिक्षक-छात्र सम्बन्ध

References

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Published

12.11.2024
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How to Cite

श्रीमद भगवद गीता और शिक्षक-छात्र के बीच सम्बन्ध का सार. (2024). Bhartiya Knowledge Systems, 2(1), 70-76. http://www.apu.res.in/index.php/bks/article/view/48

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Research Articles

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श्रीमद भगवद गीता और शिक्षक-छात्र के बीच सम्बन्ध का सार. (2024). Bhartiya Knowledge Systems, 2(1), 70-76. http://www.apu.res.in/index.php/bks/article/view/48